बीजिंग. हॉन्गकॉन्ग में चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद से जहां लोगों के बीच जश्न का माहौल है, वहीं चीन इन नतीजों पर बिफर गया है। चीनी मीडिया का कहना है कि लोकतंत्र समर्थकों को जीत इसलिए मिली, क्योंकि लोगों के बीच उनका डर था। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि मतदान दंगाइयों की भेंट चढ़ गया।
हॉन्गकॉन्ग में सोमवार को घोषित हुए जिला परिषद चुनाव के नतीजों में लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों को 452 में से 390 सीटों पर जीत मिली। यह कुल सीटों का करीब 86% रहा। वोटिंग में भी हॉन्गकॉन्ग के लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। 2015 के 14.7 लाख वोटर्स के मुकाबले इस साल 29.4 लाख लोग वोटिंग में शामिल हुए। वोटिंग का आंकड़ा 2015 के 47% के मुकाबले 71% पहुंचा।
‘विदेशी ताकतों ने सरकार विरोधी अभियानों को मजबूती दी’
चीनी मीडिया ने इन नतीजों को बेअसर दिखाने की कोशिश शुरू कर दी है। सरकारी मीडिया ग्रुप सीसीटीवी और अखबार पीपुल्स डेली ने लिखा कि सामाजिक अस्थिरता और प्रदर्शनों की वजह से मतदान प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित रही। चाइना डेली के संपादकीय में कहा गया, “मतदान में गंदी चालें चली गईं, लोगों में डर फैलाया गया। इसकी वजह से बीजिंग समर्थित उम्मीदवारों की पहुंच घटी। बाहरी (विदेशी) ताकतों ने भी सरकार विरोधी अभियानों को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई। इससे चीन समर्थित उम्मीदवारों के जीत के मौके बर्बाद हुए।”
चीन समर्थित प्रत्याशियों को अपनी बात रखने का सही मौका नहीं मिला
न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने कहा, “चुनाव दंगाइयों की भेंट चढ़ गए। कुछ देशभक्त उम्मीदवारों के अभियान प्रभावित हुए। उनके दफ्तरों को तबाह किया गया। उनमें आगजनी हुई। एक प्रत्याशी को हमले में चोटें आईं। देशभक्त उम्मीदवारों को प्रताड़ित करने का सिलसिला मतदान के दिन भी जारी रहा।” एजेंसी ने हॉन्गकॉन्ग की चीन समर्थित सर्वोच्च नेता कैरी लैम के समर्थन में कहा कि शहर के समुदाय को चीनी मैनलैंड और हॉन्गकॉन्ग के बीच रिश्तों को ठीक ढंग से समझना चाहिए।
चुनाव नतीजे पूरी जनता कीसोच नहीं दर्शाते
ग्लोबल टाइम्स ने चुनाव के नतीजों को उम्मीदवारों के लिए सोचने का विषय बताया। हालांकि, राष्ट्रवादी अखबार ने भी मतदान प्रक्रिया को राजनीतिक और सामाजिक अशांति से जुड़ा बता दिया। पहले पन्ने में छपी खबर में कहा गया कि सिर्फ 60% वोटों ने लोकतंत्र समर्थकों को 80% सीटें दिला दीं। यह पूरी जनता की सोच नहीं थी।
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