देहरादून. लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने गुरुवार को कहा कि जब अदालतें स्पीकर के फैसले पर टिप्पणी करना शुरू कर देतो तब यह चिंता का विषय है। बिड़ला ने दलबदल विरोधी कानून पर न्यायिक हस्तक्षेप का उल्लेख किया और पूछा कि इसकी जरूरत क्या है? लोकसभा अध्यक्ष का यह बयान कर्नाटक के बागी विधायकों पर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के एक महीने बाद आया है।
देहरादून में पीठासीन अधिकारियों के 79वें कॉन्फ्रेंस में बिड़ला ने कहा कि संसदीय नियमों और कागजात के अनुसार स्पीकर को अपनी भूमिका और शक्तियों का उपयोग करना चाहिए, ताकि संसद और विधानसभा में जनता का विश्वास मजबूत हो।
स्पीकर ने पूरे कार्यकाल के लिए बागी विधायकों को अयोग्या करार दिया था
कर्नाटक के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेशने 29 जुलाई कोतत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के फ्लोर टेस्ट के दौरान 17 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया था। साथ ही कहा था कि उनकी अयोग्यता विधानसभा कार्यकाल 23 मई 2023 तक बनी रहेगी। ये सभी विधायक विश्वासमत के दौरान गैरहाजिर रहे, जिससे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर गई थी। इसके बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनी।
पूरे कार्यकाल के लिए अयोग्य ठहराया जाना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबरको केआर रमेश के विधायकों को अयोग्य ठहराने के फैसले को सही बताया। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पीकर के उस आदेश को गलत ठहराया, जिसमें उन्होंने विधायकों को कर्नाटक विधानसभा के पूरे कार्यकाल के लिए ही अयोग्य ठहरा दिया था। जस्टिस रमना की बेंच ने कहा था कि विधायक पांच दिसंबर को होने वाला उपचुनाव लड़ सकते हैं। अगर वे जीतते हैं तो मंत्री भी बन सकते हैं। लोगों को स्थायी सरकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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