हैदराबाद. तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या के 4 आरोपियों के एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को इस मामले में याचिका दायर की गई। इसमें एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर, जांच और कार्रवाई की मांग की गई। याचिकाकर्ता एडवोकेट जीएस मणि और प्रदीप कुमार यादव ने कहा है कि इस मामले में पुलिस ने 2014 की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया।
एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट की 2014 की गाइडलाइंस
- एनकाउंटर होने के बाद उसकी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है। एनकाउंटर में मारे गए या घायल हुए लोगों के परिवार को तुरंत सूचना देनी होगी। सभी मौतों की मजिस्ट्रेट जांच होगी। एनकाउंटर की जांच सीआईडी की टीम या किसी दूसरे पुलिस स्टेशन की टीम करेगी। ये जांच एनकाउंटर में शामिल टीम के प्रमुख से एक पद ऊंचे अधिकारी की निगरानी में होगी।
- एनकाउंटर में होने वाली मौत की सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग को देना जरूरी है।
जया बच्चन और स्वाति मालीवाल पर कार्रवाई की मांग
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में वकील एमएल शर्मा ने एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायालय की निगरानी में एसआईटी गठित करने की मांग की। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन करने के लिए जया बच्चन और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के खिलाफ केस दायर किया।
मानवाधिकार आयोग ऑन स्पॉट इन्वेस्टिगेशन करेगा
दूसरी तरफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक टीम शनिवार सुबह एनकाउंटर की जांच के लिए हैदराबाद पहुंची। एनएचआरसी की दो सदस्यीय टीम पहले शादनगर के चटनपल्ली जाएगी, जहां पुलिस ने आरोपियों का एनकाउंटर किया था। सूत्रों के मुताबिक, टीम ऑन स्पॉट इन्वेस्टिगेशन करेगी। इसके अलावा घटना में शामिल पुलिसकर्मियों से विवरण लिया जाएगा। इसके बाद अधिकारी सरकारी अस्पताल जाएंगे, जहां चारों आरोपियों की ऑटोप्सी की गई।
एनएचआरसी ने शुक्रवार को ही इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी थी। जांच के लिए मानवाधिकार आयोग के निदेशक से तुरंत तथ्य जुटाने वाली टीम भेजने की मांग की गई। इस टीम का नेतृत्व एसएसपी स्तर का अफसर करेगा। एनएचआरसी के मुताबिक, पुलिसकर्मी इस मामले में पूरी तरह अलर्ट नहीं थे। उन्होंने आरोपियों के किसी एक्शन के लिए भी तैयारी नहीं की थी। आयोग के मुताबिक, अगर आरोपी असल में भी दोषी थे, तो इसका फैसला कानून के अनुसार कोर्ट को ही करना था।
तेलंगाना हाईकोर्ट ले चुकी है मामले का संज्ञान
मारे गए चारों आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में थे। इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ही संज्ञान ले लिया। तेलंगाना के एडवोकेट जनरल रात 8 बजे हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के सामने पेश हुए थे। उन्होंने बेंच को बताया कि आरोपियों के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि वीडियो की सीडी या पेनड्राइव को महबूबनगर के मुख्य जिला जज को दिया जाए। इसे बाद में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को दिया जाएगा।
पुलिस का दावा- री-क्रिएशन के दौरान मारे गए आरोपी
तेलंगाना में वेटरनरी डॉक्टर से दुष्कर्म के चारों आरोपियों को पुलिस ने शुक्रवार तड़के उसी जगह एनकाउंटर में मार गिराया, जहां पीड़ित को जिंदा जलाया गया था। पुलिस ने बताया कि री-क्रिएशन के दौरान आरोपियों ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में की गई फायरिंग में चारों आरोपी मारे गए।
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