नई दिल्ली. कांग्रेस दिल्ली के रामलीला मैदान में शनिवार को मोदी सरकार के खिलाफ भारत बचाओ रैली करेगी। इसमें देशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचेंगे। सूत्रों ने बताया कि रैली में कांग्रेस का फोकस राहुल गांधी पर होगा। साथ ही देश में गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी समेत किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दे उठाकर सरकार को घेरने का प्रयास किया जाएगा। बताया जा रहा है कि रैली में राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने की योजना है।
सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना होगी: सूत्र
सूत्रों ने बताया कि रैली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधेंगे। रैली का फोकस मोदी सरकार की नीतियों पर पुरजोर हमला करना है। सूत्रों के मुताबिक, रैली के लिए कांग्रेस का नारा ‘मोदी है तो मंदी है’ होगा।
रैली के जरिए राहुल के लिए माहौल बनाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, टीम राहुल की कोशिश है कि रैली में एक बार फिर राहुल को प्रोजेक्ट और उनके लिए माहौल तैयार करने की योजना है। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसी संभावनाएं भी हैं कि रैली में राहुल गांधी को एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग उठे।
पार्टी के नेता ने न्यूज एजेंसी को बताया कि रैली में कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में राहुल गांधी का मास्क लगाए दिखेंगे। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई रैली में पूरी तरह से राहुल का समर्थन करते दिखेंगी। कार्यकर्ताओं के हाथ में बैनर, पोस्टर, झंडे होंगे, जो पार्टी नेतृत्व के लिए राहुल के पक्ष में माहौल तैयार करेंगे।
कांग्रेस नेता चाहते हैं राहुल वापसी करें
वैसे अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल गांधी पार्टी के मामलों में कम ही दखल दे रहे हैं। उनका ज्यादातर समय उनके संसदीय क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में ही जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस के कई नेताओं ने यह बयान दिए हैं कि राहुल गांधी को वापसी करना चाहिए।
सोनिया के अध्यक्ष बनने के बाद पहली मेगा रैली
सोनिया गांधी के पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला मौका है, जब कांग्रेस मेगा रैली का आयोजन करने जा रही है। हालांकि, इसका मकसद कांग्रेस पार्टी में टीम राहुल की ताकत का प्रदर्शन करना भी है। पहले यह रैली 30 नवंबर को होने वाली थी, मगर बाद में संसद के शीतकालीन सत्र के मद्देनजर इसका समय 14 दिसंबर तय किया गया।
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