नई दिल्ली. नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकारों में शामिल वजाहत हबीबुल्लाह जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच के निर्देश के बाद शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल का दौरा किया था। सुप्रीम कोर्ट शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने और इलाके में सुचारू यातायात सुनिश्चित करने की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने शाहीन बाग में सड़क अवरुद्ध किए जाने पर एक हलफनामा भी दायर किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ वकील संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन लगातार चौथे दिन शनिवार को शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने पिछले दो महीने में घटी घटनाओं की जांच कराने और सुरक्षा के लिए प्रदर्शन स्थल की स्टील शीट से घेराबंदी की मांग की थी।
हबीबुल्लाह नेप्रदर्शनस्थल पर हुई दिक्कतों के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार माना
हबीबुल्लाह ने हलफनामे में प्रदर्शनस्थल पर चल रही समस्याओं के लिए दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार माना है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सीएए के खिलाफ यहां शाहीन बाग में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। यहां यात्रियों को आने-जाने में असुविधा इसलिए हो रही थी, क्योंकि साइट से दूर सड़कों पर पुलिस द्वारा बेवजह बैरिकेड्स लगाए गए थे। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सैयद बहादुर अब्बास नकवी और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर आजाद ने भी संयुक्त रूप से कोर्ट में हलफनामा दायर किया है।
इससे पहले कोर्टनेकहा था कि लोगों को शांतिपूर्वक और कानूनी रूप सेविरोध करने का मौलिक अधिकार है। हम केवल शाहीन बाग मेंसड़क के अवरुद्ध होने से परेशान हैं, क्योंकि इससे अराजक स्थितिपैदा हो सकती है।
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