नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को चुनौती देने वाली 60 याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली पीठ इनकी सुनवाई करेगी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और असम गण परिषद समेत कई लोगों ने ये याचिकाएं दायर की हैं।
नागरिकता संशोधन बिल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर को हस्ताक्षर कर दिए थे। कानून के मुताबिक, 2014 तक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए गैर-मुस्लिमों (बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी) को नागरिकता मिल सकेगी।
याचिकाओं में क्या कहा गया
याचिकाओं के मुताबिक- नागरिकता देने के लिए धर्म को आधार नहीं बनाया जा सकता, जबकि नया कानून संविधान के आधारभूत ढांचे का उल्लंघन करता है। नया कानून अवैध रूप से आए शरणार्थियों को धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात कहता है। यह जीवन और समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि कानून से देश का धर्मनिरपेक्ष का सिद्धांत भी प्रभावित होगा। सरकार का दायित्व है कि वह सभी धर्मों के लोगों से समान व्यवहार करे।
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