दाहोद (इरफान मलिक).कुपोषण से जंग के लिए गुजरात में मुर्गा-मुर्गी पालन की मदद ली जा रही है। अति कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए 1 मुर्गा और 10 मुर्गियां पालने के लिए दी जा रही हैं, ताकि वे इनके अंडे खाकर सेहतमंद हों। ये मुर्गा-मुर्गी पालन की पहल पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
दाहोदपशुपालन विभाग केअधिकारी केएलगोसाई ने कहा- अभी 5 तहसीलें पायलट प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। हर तहसील में 33 अतिकुपोषित बच्चों को इस योजना केलिएचुना गया है। अच्छे परिणाम रहने पर इसका विस्तार कर पूरे जिले को शामिल किया जाएगा।
शाकाहारी-मांसाहारी का भेद नहीं
दाहोद गुजरात का आदिवासी बहुल जिला है। यहां बड़ी संख्या में लोगों ने आस्था-धार्मिक विश्वास और जीवनशैली के चलते मांसाहार-शराब से दूरी बना ली है। सरकार की नजर में भले ही अंडा शाकाहार की श्रेणी में है, लेकिन आम लोगों के लिए यह शाकाहार नहीं है। यह नहीं देखा गया है कि संबंधित बच्चे का परिवार शाकाहारी है अथवा मांसाहारी।
एक महीने में 15 से 20 अंडे देती है इस प्रजाति की मुर्गी
कड़कनाथ जाति के मुर्गी-मुर्गे दिए जाने हैं। शीतऋतु में ये मुर्गियां अपने अंडे खुद खा जाती हैं। इसलिए खुद मुर्गियों से ही अंडा बचाने की चुनौती भी है। कड़कनाथ मुर्गी का जीवन काल 6 से 8 महीना होता है। ये मुर्गियां 02-03 दिन के अंतराल पर अंडे देती हैं। इन मुर्गियों से 15 से 20 अंडे मिलने में तकरीबन एक महीना गुजर जाता है।
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