अराजकता, आतंक और आपदा से जूझ रहे देश में युवाओं ने सेहत और कारोबार दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया

मोगादिशु (अबदी लतीफ दहिर).सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में 27 साल की डॉक्टर अमीना अब्दुल कादिर इसैक खून की कमी से जूझ रही गर्भवती महिलाओं का ध्यान रखने में जुटी हुईं थी। तभी दिसंबर में भयानक बाढ़ आ गई। लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। इसैक का अभियान इस आपदा के बीच भी जारी रहा। इससे उबरे ही नहीं थे कि मोगादिशु में विस्फोटों से भरे ट्रक में धमाका किया गया। इसमें 82 लोगों की मौत हो गई। वहीं 150 से ज्यादा घायल हुए। इनमें कई यूनिवर्सिटी और मेडिकल छात्र भी थे। अपनी युवा ब्रिगेड को लेकर इसैक घायलों की देखभाल में जुट गईं। उनके परिवारों को बुलाया, इलाज के लिए फंड जुटाया।

युवाओं में जगी नई उम्मीद

पिछले तीन दशक से अराजकता, चरंपथी हमलों और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे सोमालिया में स्थानीय युवाओं के कारण नई उम्मीद जगी है। ये युवा सरकार किसी भी समस्या से निपटने के लिए सरकार की तरफ नहीं देखते। बाढ़, बम धमाके, मेडिकल इमरजेंसी जैसी समस्याओं के वक्त खुद जुट जाते हैं। विदेश से पढ़कर लौटे युवा भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका से लौटी सईदा हसन बताती हैं कि 2017 में हुए भीषण धमाकों 600 लोग मारे गए थे, वहीं 300 से ज्यादा घायल थे। हमारे साथियों ने सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए 25 करोड़ रु. एंबुलेस सेवा के िलए जुटा लिए थे। हजारों सोमाली लोगों को सेवा देने वाली सामीऑनलाइन के प्रमुख सामी गबास बताते हैं कि बड़ी चुनौती के बाद स्टार्टअप शुरू किया। मदद प्रोत्साहन देना तो दूर, उस पर फिजूल के टैक्स अलग मांगे जाते हैं। हम सिर्फ बिजनेस नहीं कर रहे, रोजगार भी पैदा कर रहे हैं, देश को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकारों को यह समझना होगा।

भाई की हत्या के बाद बहन ने संभाला बिजनेस, युवाओं को प्रेरित कर रही

31 साल के युवा मोहम्मद शेख ने मोगादिशु में कई उद्योग शुरू किए। पर 2018 में उनकी हत्या कर दी गई। अब उनकी बहन सगल शेख काम संभाल रही हैं। पहले तो सगल सोचती थीं कि देश छोड़ देना चाहिए। पर उन्होंने भाई के सपनों के लिए रुकने का फैसला लिया। अब वो अन्य युवाओं को भी प्रेरित कर रही हैं।



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वॉलंटियर्स के साथ डॉ. अमीना (दाएं)।


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