प्रदूषण कम होने से चीन में 100 दिन में 70 हजार जानें बचीं, यूरोप और एशिया में हवा अब सांस लेने लायक

वॉशिंगटन.दुनिया के 183 देश इस वक्त कोरोनावायरस की चपेट में हैं,लेकिन वैज्ञानिकों ने इसकीपॉजिटिव साइड इफेक्ट भी खोज निकाला है। प्रदूषण कम होने के कारण चीन में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर काफी कम हुआ है। आसमान साफ दिखने लगा है। इटली में वेनिस की नहरों का पानी भी साफ हो गया है। अमेरिका में भी प्रदूषण का स्तर गिरा है। संक्रमण को रोकने के लिए चीन में औद्योगिक गतिविधियां अस्थाई तौर पर रुक गई हैं।

एक महीने में चीन में कच्चे तेल और कोयले की खपत भी 36% घटी है। साथ ही चीन में फरवरी में कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 20 करोड़ टन कम हुआ है, जो बीते साल से 25% कम है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्शल बर्क ने बताया है कि चीन में बीते 100 दिनों में कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन की वजह से करीब 50 से 75 हजार लोग प्री-मैच्योर मौत (समय से पहले) से बच गए।

अमेरिका में ट्रैफिक घटा, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 10% कम

कोरोना संक्रमण फैलने के बाद अमेरिका के कई शहरों में भी औद्योगिक गतिविधियां कम हुई हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के अनुसार अकेले न्यूयॉर्क शहर में ट्रैफिक 25% घटा है। कार्बन मोनोऑक्साइड 50% और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 10% घटा है। एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप को मिला लें तो दुनिया का 88% कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन यहीं से हो जाता है। आवर वर्ल्ड इन डेटा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन और अमेरिका मिलकर दुनिया का 42% कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं।

10 साल में पहली बार साफ दिखा मुंबई का आसमान

भारत में भी प्रदूषण कम हुआ है। कोरोना से सुरक्षा के मद्देनजर ज्यादार लोग घरों में कैद हैं। कर्मचारी घरों में रहकर काम कर रहे हैं। ऐसे में मुंबई में आसमान और हवा साफ होने लगी है। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा- 10 साल में पहली बार आसमान साफ दिखाई दिया।



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यूरोपियन स्पेस एजेंसी और नासा ने सैटेलाइट इमेज के जरिए जनवरी में दुनिया के प्रमुख शहरों के वातावरण में घातक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन दिखाया था।
जनवरी में उत्तरी इटली में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर काफी ज्यादा था जबकि मार्च में यह पूरी तरह गायब हो गया।


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